📰 एमपी में एक साथ 177 अधिकारियों को हटाया गया, मची अफरातफरी!
भोपाल।
मध्यप्रदेश में प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब सरकार ने एक ही झटके में 177 अधिकारियों का तबादला कर डाला। इस अचानक हुई बड़ी प्रशासनिक सर्जरी से न केवल अफसरशाही में हलचल है, बल्कि राजनैतिक गलियारों में भी चर्चाओं का बाजार गर्म है।
🔁 तबादलों की बुलेट लिस्ट:
- 70 अपर कलेक्टर
- 107 राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रभारी डिप्टी कलेक्टर व अन्य अधिकारी
कुल मिलाकर, प्रदेश के 177 अधिकारियों को उनके वर्तमान पदों से हटाकर नई जिम्मेदारियों में भेजा गया है।
🗂 किसने जारी किए आदेश?
यह आदेश सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की ओर से सोमवार देर रात को जारी किया गया।
- 107 अधिकारियों की सूची उप सचिव ब्रजेश सक्सेना द्वारा जारी की गई है।
- 70 अधिकारियों की सूची अवर सचिव एस.के. सेंद्रे ने जारी की है।
इस लिस्ट में प्रदेश के कई संयुक्त कलेक्टर, अपर कलेक्टर और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हैं, जिनका कार्यक्षेत्र अब बदल चुका है।
🎯 सर्जरी का मकसद या संकेत?
इतने बड़े पैमाने पर किए गए तबादले आमतौर पर संकेत देते हैं कि या तो:
- सरकार प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त करना चाहती है
- या कोई बड़ी राजनैतिक या चुनावी रणनीति का हिस्सा हैं।
कुछ इसे आगामी पंचायत चुनावों या विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने की तैयारी से जोड़कर देख रहे हैं।
📣 क्या कहते हैं जानकार?
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर एक साथ ट्रांसफर किया जाना सरकार के भीतर गहराई से चल रही रणनीतिक सोच को दर्शाता है। वहीं कुछ अफसरों ने इसे 'सरप्राइज़ अटैक' की तरह लिया है — जिसमें अचानक आदेश आ जाने से कई अधिकारी चौंक गए।
🔍 आगे क्या?
इन तबादलों के बाद नए जिम्मेदारियों को निभाने की चुनौती अफसरों के सामने है। अब देखना यह है कि नई जगहों पर ये अधिकारी कैसा प्रदर्शन करते हैं और प्रशासन की रफ्तार कितनी तेज होती है।
📌 निष्कर्ष:
मध्यप्रदेश सरकार का यह कदम प्रशासनिक मजबूती के लिहाज से बड़ा माना जा रहा है। लेकिन इसके पीछे की राजनीति को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। क्या ये तबादले बेहतर प्रशासन की दिशा में उठाया गया साहसिक कदम हैं या फिर कोई और कहानी है — इसका जवाब समय ही देगा।
🖊️ लेखक: युनुस खान
विकास किरण न्यूज़
(सत्य, साहस और सरोकार के साथ)
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