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मणिपुर में हुए धमाके में दो मासूम बच्चों की मौत के बाद Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री Narendra Modi से तीखे सवाल पूछे।

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असम में परिसीमन पर सियासत तेज: क्या घटेगा मुस्लिम प्रतिनिधित्व?

रिपोर्ट: युनुस खान (विकास किरण न्यूज) लोअर असम के बरपेटा ज़िले की मंदिया सीट पर कांग्रेस की रैली में उमड़ी भारी भीड़ इस बात का संकेत देती है कि चुनावी माहौल में स्थानीय मुद्दे ज़ोर पकड़ रहे हैं। यहां बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी अधिक देखी गई। असम की राजनीति में इस समय कई मुद्दे चर्चा में हैं, लेकिन मुस्लिम समुदाय के बीच सबसे ज्यादा चिंता परिसीमन (Delimitation) को लेकर देखी जा रही है। इसके अलावा बेदखली, भेदभाव, पिछड़ापन और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दे भी लोगों के बीच प्रमुख हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, असम की कुल आबादी में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी करीब 35 प्रतिशत है, जो जम्मू-कश्मीर के बाद देश में सबसे अधिक है। 126 सदस्यीय असम विधानसभा में फिलहाल 31 मुस्लिम विधायक हैं, जिनमें कांग्रेस और एआईयूडीएफ़ के विधायक शामिल हैं। परिसीमन के बाद बदला सियासी गणित साल 2023 में चुनाव आयोग द्वारा किए गए परिसीमन के बाद कई विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं बदल दी गईं, जिससे राजनीतिक समीकरण भी बदलते नजर आ रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में म...

Journalist Yunus Khan | Editor Vikas Kiran News Bhopal

Yunus Khan | Journalist | Vikas Kiran News Yunus Khan Journalist | Editor – Vikas Kiran News Yunus Khan is an Indian journalist and media professional from Bhopal, Madhya Pradesh. He is the editor of Vikas Kiran News and actively reports on social issues, politics and public interest stories. He is known for independent journalism and digital news reporting. © Vikas Kiran News

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🗞️ Vikas Kiran News – Today E-Paper 📅 Published on: 📥 Download Today PDF Vikas Kiran News का यह डिजिटल संस्करण मध्यप्रदेश, भोपाल और देश-दुनिया की ताज़ा, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरों को आप तक पहुँचाने के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। हमारा लक्ष्य है — सच, साहस और सेवा । © Vikas Kiran News | All Rights Reserved

ज़हरीली मांगुरा मछली: सेहत और पर्यावरण पर खतरा

ज़हरीली मांगुरा मछली: सेहत और पर्यावरण पर खतरा एनजीटी का आदेश: जहां दिखे, तुरंत नष्ट की जाए भोपाल में प्रतिबंधित विदेशी मांगुरा (थाई मागुर) मछली का पालन और विक्रय खुलेआम जारी है। यह मछली मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा मानी जा रही है। ⚠️ पब्लिक अवेयरनेस गंदे और प्रदूषित पानी में पनपने वाली मछली संक्रमण और गंभीर बीमारियों का खतरा लंबे समय तक सेवन से लीवर व आंतों को नुकसान ⚖️ NGT का स्पष्ट आदेश Clarias gariepinus (थाई मागुर) पूर्णतः प्रतिबंधित पालन, प्रजनन और बिक्री गैरकानूनी जहां भी मिले – तुरंत नष्ट करने के निर्देश 🚨 भोपाल में खुला उल्लंघन तालाबों में अवैध पालन बाजारों...

भारत का रुपया फिर गिरा! नाथपंथी जी का मिर्च-मसाला तड़का व्यंग्य | Rupee vs Dollar Satire

🌶️ नाथपंथ न्यूज़: रुपया फिर गिरा… और देश में लगी मिर्च-मसाला चौक की घंटी! — नाथपंथी जी की चटपटी व्यंग्य रिपोर्ट भारत का रुपया आज फिर डॉलर के सामने ऐसे फिसला जैसे गर्मी में चाट वाले के हाथ से आलू टिक्की फिसलकर सीधे नाली में गिर जाए। और जैसे ही रुपया गिरा — पूरे देश के मिर्च-मसाला चौक , तड़का गली और झणाझण न्यूज़ मंडी में बवाल मच गया। 🌶️ अंधभक्त मंडली की प्रतिक्रिया — “ये सब वैश्विक षड्यंत्र है!” पहला भक्त बोला: “रुपया नहीं गिरा, डॉलर ज्यादा उठ गया है!” दूसरा भक्त: “56 इंच का card जारी करो—डॉलर डरकर नीचे आएगा!” तीसरा भक्त (सबसे वरिष्ठ): “अगर रुपया गिरा भी है तो क्या हुआ? राष्ट्रवाद भी कभी-कभी झुक जाता है।” वाट्सऐप यूनिवर्सिटी ने तुरंत फॉरवर्ड भेजा: “रुपया इसलिए गिरा क्योंकि भारत बहुत संस्कारी देश है—दूसरों को ऊपर उठता देख खुश होता है।” 🍳 राजनेताओं का तड़का — सब अपनी-अपनी कड़ाही गरम कर रहे हैं विपक्ष: “रुपया सरकार के वादों की तरह है — बोलता कुछ और है, टिकता कहीं और है!” सत्ता पक्ष: “रुपया गिरा नहीं है, योग निद्रा में है। ध्यान कर रहा है...

भोपाल में तनाव: पत्थरबाज़ी, बयानबाज़ी और हमारी गंगा-जमुनी तहजीब

विशेष रिपोर्ट • युनुस खान विकास किरण ब्लॉग •  अरिफ नगर में गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान जो विवाद शुरू हुआ, वह बहुत जल्द ही केवल एक घटनाक्रम से आगे बढ़कर शहर के राजनीतिक और सामाजिक माहौल की चर्चा बन गया। शुरुआती मीडिया कवरेज में पत्थरबाज़ी के आरोप उठे — पर अब पुलिस की जांच ने तस्वीर को बदल कर रख दिया है। पुलिस जांच — क्या मिला? स्थानीय पुलिस ने विस्तृत तफ्तीश के बाद निष्कर्ष निकाला है कि पत्थरबाज़ी के जो आरोप लगे थे, वे ठोस तौर पर साबित नहीं हुए। जांच में यह संकेत मिला कि यह मामला किसी सामुदायिक संघर्ष से ज़्यादा आपसी रंजिश और कुछ व्यक्तियों द्वारा झूठे आरोप लगाकर एक समुदाय विशेष को निशाना बनाने की कोशिश था। पुलिस ने कहा है कि अफवाह फैलाई गई और साजिश के इरादे से गलत आरोप लगाए गए। "जांच में यह स्पष्ट हुआ कि घटना की जो तस्वीर बनाई जा रही थी, वह वास्तविकता से मेल नहीं खाती।" — पुलिस सूत्र समाजसेवी मोहसिन अली खान की प्रतिक्रिया समाजसेवी मोहस...